12 एकड़ में आधुनिक खेती का मॉडल, कलेक्टर ने प्रगतिशील किसान लालजी मौर्य के खेत का किया निरीक्षण
फसल विविधीकरण, डीएसआर तकनीक और पशुपालन से खेती बनी लाभ का जरिया, तीनों सीजन में 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफे का दावा

फसल विविधीकरण, डीएसआर तकनीक और पशुपालन से खेती बनी लाभ का जरिया, तीनों सीजन में 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफे का दावा,
राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। आधुनिक कृषि तकनीकों, फसल विविधीकरण और पशुपालन को अपनाकर ग्राम कन्हवारा के प्रगतिशील कृषक लालजी मौर्य ने खेती को लाभकारी व्यवसाय का स्वरूप दिया है। करीब 12 एकड़ भूमि में अपने दो छोटे भाइयों के साथ मिश्रित एवं बहुफसली खेती कर रहे श्री मौर्य वर्षभर अलग-अलग फसलों का उत्पादन लेने के साथ पशुपालन से भी अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।
कलेक्टर आशीष तिवारी ने ग्राम कन्हवारा पहुंचकर प्रगतिशील कृषक लालजी मौर्य के खेत का निरीक्षण किया। उन्होंने खेत में लगी विभिन्न फसलों का अवलोकन करते हुए कृषक से उत्पादन, कृषि तकनीकों और खेती से होने वाली आय के संबंध में जानकारी ली। इस दौरान कलेक्टर ने पशुपालन विभाग की डेयरी प्लस योजना की जानकारी देते हुए कृषक को योजना का लाभ लेने के लिए प्रेरित किया।
धान में डीएसआर पद्धति, कतार पद्धति से खेती को बढ़ावा
कृषक लालजी मौर्य खेती में पारंपरिक तरीकों के साथ आधुनिक तकनीकों का प्रयोग कर रहे हैं। धान की खेती में उनके द्वारा डीएसआर (डायरेक्ट सीडेड राइस) पद्धति अपनाई जा रही है। इसके अलावा सब्जियों, उद्यानिकी तथा अनाज की फसलों में कतार पद्धति सहित अन्य आधुनिक कृषि तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है। गन्ना और अदरक जैसी फसलें भी उनके कृषि मॉडल का हिस्सा हैं।
खरीफ में 9 एकड़ धान, अन्य फसलों का भी उत्पादन
वर्तमान खरीफ सीजन 2026-27 में लालजी मौर्य द्वारा करीब 9 एकड़ में धान, एक एकड़ में अरहर तथा आधे-आधे एकड़ में गन्ना, अदरक और कद्दू की खेती की जा रही है। इसके साथ ही करीब आधे एकड़ में आम के पौधे लगाए गए हैं, जिससे आगामी वर्षों में अतिरिक्त आय की उम्मीद है।
तीनों सीजन में अलग-अलग फसलों से सालभर आय का प्रयास
कृषक लालजी मौर्य ने फसल विविधीकरण को अपनी खेती का प्रमुख आधार बनाया है। खरीफ सीजन में धान के साथ उड़द, अरहर और विभिन्न सब्जियों का उत्पादन किया जाता है। रबी सीजन में गेहूं, चना, मसूर, मिर्च और गोभी जैसी फसलें ली जाती हैं। वहीं जायद सीजन में उड़द, मूंग के साथ ककड़ी, कलिंदर और खरबूजा जैसी फसलों का उत्पादन किया जाता है।
इस तरह अलग-अलग मौसम में विविध फसलें लेकर किसान वर्षभर खेत से आय प्राप्त करने का प्रयास कर रहे हैं।
खेती के साथ पशुपालन से भी अतिरिक्त आमदनी
लालजी मौर्य ने कृषि के साथ पशुपालन को भी अपनी आजीविका का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। उनके पास उन्नत नस्ल की गायों के अलावा चार भैंसें हैं, जिनसे दुग्ध उत्पादन किया जा रहा है। कृषि और पशुपालन के इस समन्वित मॉडल से उन्हें अतिरिक्त आय का स्रोत मिल रहा है।
तीनों सीजन में 10 से 12 लाख रुपये तक मुनाफे का दावा
कृषक लालजी मौर्य के अनुसार विभिन्न फसलों, पशुपालन और अन्य कृषि गतिविधियों से तीनों सीजन को मिलाकर करीब 10 से 12 लाख रुपये तक का मुनाफा अर्जित हो रहा है। उनका कहना है कि आधुनिक कृषि तकनीक, फसल विविधीकरण और पशुपालन को अपनाने से खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है।
समस्या आने पर वैज्ञानिकों से सलाह लेने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर आशीष तिवारी ने कृषक को फसलों में बीमारी, कीट अथवा खरपतवार की समस्या सामने आने पर कृषि वैज्ञानिकों से संपर्क कर वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उपचार एवं प्रबंधन अपनाने की सलाह दी। उन्होंने अन्य कृषकों को भी आधुनिक कृषि तकनीकों के साथ वैज्ञानिक पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
कन्हवारा के कृषक लालजी मौर्य की यह पहल खेती में नवाचार, फसल विविधीकरण और कृषि-पशुपालन के समन्वय के जरिए किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में एक प्रेरक उदाहरण के रूप में सामने आई है।




