भ्रूण लिंग परीक्षण पर सख्ती, सोनोग्राफी केंद्रों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश पीसीपीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की बैठक में कलेक्टर आशीष तिवारी ने की समीक्षा,
गर्भवती महिलाओं को समय पर बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने पर दिया जोर

✍️राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज है
कटनी। जिले में भ्रूण लिंग परीक्षण पर प्रभावी रोक लगाने के साथ गर्भवती महिलाओं को सुरक्षित, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण प्रसव पूर्व जांच सेवाएं उपलब्ध कराने को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। मंगलवार को पीसी एंड पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत गठित जिला सलाहकार समिति की बैठक में कलेक्टर आशीष तिवारी ने अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, निजी सोनोग्राफी केंद्रों की निगरानी और गर्भवती महिलाओं को मिल रही स्वास्थ्य सेवाओं की विस्तार से समीक्षा की।
कलेक्टर तिवारी ने कहा कि पीसीपीएनडीटी एक्ट का उद्देश्य केवल भ्रूण के लिंग परीक्षण पर रोक लगाना नहीं है, बल्कि गर्भवती महिलाओं के हितों की रक्षा करना और प्रसव पूर्व जांच सेवाओं को नियमानुसार सुचारू रूप से उपलब्ध कराना भी है। उन्होंने अधिकारियों को शासन के दिशा-निर्देशों का गंभीरता से पालन कराने और निगरानी व्यवस्था को लगातार मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए।
निजी सोनोग्राफी केंद्रों से समय पर जानकारी लेने के निर्देश
बैठक में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत संबद्ध निजी सोनोग्राफी केंद्रों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं को सोनोग्राफी सुविधा उपलब्ध कराने के संबंध में चर्चा की गई। कलेक्टर ने संबंधित केंद्रों से आवश्यक सहमति प्राप्त करने की प्रक्रिया समय-सीमा में पूरी करने के निर्देश दिए, ताकि पात्र महिलाओं को जांच के लिए अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े।
उन्होंने निजी सोनोग्राफी केंद्रों से एएनसी यानी प्रसव पूर्व जांच से संबंधित जानकारी निर्धारित प्रारूप में नियमित रूप से और समय-सीमा के भीतर प्राप्त करने के निर्देश भी दिए।
सोनोग्राफी मशीन दान की प्रक्रिया नियमों के तहत होगी
बैठक में डॉ. उमा निगम द्वारा पुरानी सोनोग्राफी मशीन दान किए जाने का प्रस्ताव भी रखा गया। कलेक्टर ने मशीन की आवश्यक तकनीकी जांच कराने तथा शासन द्वारा निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार दान की कार्यवाही पूरी करने के निर्देश दिए।
पांच आवेदनों के शीघ्र निराकरण के निर्देश
पीसीपीएनडीटी एक्ट के तहत एमपी ऑनलाइन के माध्यम से प्राप्त चार एडिट आवेदन और एक रिन्युवल आवेदन की समीक्षा भी की गई। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को नियमानुसार कार्रवाई करते हुए लंबित आवेदनों का शीघ्र निराकरण करने तथा पात्र मामलों में लाइसेंस जारी करने के निर्देश दिए।
भ्रूण लिंग परीक्षण पर निगरानी रहेगी सख्त
बैठक में बताया गया कि जिले में वर्तमान में भ्रूण लिंग परीक्षण से संबंधित कोई शिकायत प्राप्त नहीं हुई है। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस स्थिति को बनाए रखने के लिए सोनोग्राफी केंद्रों की गतिविधियों पर सतत निगरानी रखी जाए और पीसीपीएनडीटी एक्ट के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि गर्भस्थ शिशु के लिंग की जांच कराना अथवा उसके आधार पर किसी भी प्रकार का भेदभाव कानूनन गंभीर अपराध है। ऐसे मामलों की रोकथाम के लिए संबंधित विभागीय अमले को पूरी सतर्कता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए गए।
नसबंदी फेल के 12 प्रकरण राज्य स्तर पर भेजे
बैठक में राष्ट्रीय परिवार कल्याण क्षतिपूर्ति योजना की भी समीक्षा की गई। नसबंदी फेल होने से संबंधित 12 प्रकरणों को जिला क्वालिटी इंश्योरेंस कमेटी द्वारा अनुमोदित किए जाने की जानकारी दी गई। इन प्रकरणों को राज्य क्वालिटी इंश्योरेंस कमेटी, भोपाल भेजा गया है।
राज्य स्तर से अनुमोदन मिलने के बाद पात्र हितग्राहियों को प्रत्येक प्रकरण में 30 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति राशि प्रदान की जाएगी। कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक प्रक्रिया शीघ्र पूरी करने और पात्र हितग्राहियों को योजना का लाभ समय पर दिलाने के निर्देश दिए।
ये रहे उपस्थित
बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राज सिंह ठाकुर, सिविल सर्जन डॉ. यशवंत वर्मा, डॉ. आर्यन तिवारी, स्त्री रोग विशेषज्ञ एवं पीएनडीटी जिला सलाहकार समिति की सदस्य डॉ. मनीष मिश्रा, शिशु रोग विशेषज्ञ सदस्य डॉ. उमा निगम, जागृति सोसायटी के सदस्य मनोज श्रीवास्तव, जिला जनसंपर्क अधिकारी एवं पीएनडीटी कमेटी सदस्य, रेडियोलॉजिस्ट डॉ. एल.एल. अग्रवाल, डॉ. आर.के. अठया, डॉ. अनिल वाटवे, डॉ. अब्दुल हकीम, डॉ. अखिलेश गुप्ता, डॉ. शगुन गुप्ता, नितिन तपा, पीएनडीटी डाटा मैनेजर अरुण कुमार कमल सहित संबंधित अधिकारी एवं समिति के सदस्य उपस्थित रहे।




