जल संरक्षण की मुहिम से बदली गांवों की तस्वीर, 25 करोड़ लीटर से ज्यादा बारिश का पानी सहेजा

जल संरक्षण की मुहिम से बदली गांवों की तस्वीर, 25 करोड़ लीटर से ज्यादा बारिश का पानी सहेजा,
✍️राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कैमोर। कटनी जिले के विजयराघवगढ़ विकासखंड में जल संरक्षण और भूजल संवर्धन को लेकर किए जा रहे प्रयासों का सकारात्मक असर अब धरातल पर दिखाई देने लगा है। अदाणी सीमेंट बिजनेस कैमोर एवं अमेहटा सीमेंट वर्क्स के सीएसआर के तहत अदाणी फाउंडेशन द्वारा क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में कराए गए विभिन्न जल संरक्षण कार्यों से 25 करोड़ लीटर से अधिक वर्षा जल को सहेजने में मदद मिली है।
कैमोर और अमेहटा प्लांट से लगे बड़ारी, कलहरा, झिरिया, नन्हवारा, सलैया कौहारी, रजरवारा नंबर-2, अमेहटा और गुड़गुड़ौहा सहित आसपास के गांवों में बारिश के पानी को रोकने और भूजल स्तर बढ़ाने के उद्देश्य से कई जल संरचनाओं का निर्माण और सुधार कराया गया है।
इन कार्यों में तालाबों का गहरीकरण और डी-सिल्टेशन, इनलेट-आउटलेट का निर्माण एवं सुधार, चेक डेम, नालों की सफाई, संकेन बॉक्स, गली प्लग, गेवियन और लूज बोल्डर स्ट्रक्चर जैसे कार्य प्रमुख हैं।
पहाड़ों से बहकर महानदी में जाने वाले पानी को गांवों में रोकने की पहल
बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों से निकलने वाला पानी कई नालों के जरिए सीधे महानदी में पहुंच जाता था। ऐसे में अदाणी फाउंडेशन ने जल संरक्षण संरचनाओं के माध्यम से इस बहाव को स्थानीय स्तर पर रोकने की दिशा में काम किया।
इन संरचनाओं के जरिए बारिश के पानी को गांवों के आसपास रोका जा रहा है, जिससे पानी को जमीन में उतारने और भूजल स्तर को रिचार्ज करने में मदद मिल रही है।
सिल्ट हटने से बढ़ी तालाबों की जल भंडारण क्षमता
ग्रामीणों के मुताबिक, वर्षों से तालाबों में सिल्ट जमा होने के कारण उनकी जल भंडारण क्षमता लगातार कम हो रही थी। कई स्थानों पर तालाबों के आउटलेट क्षतिग्रस्त होने से बारिश का पानी भी लंबे समय तक नहीं रुक पाता था।
अदाणी फाउंडेशन द्वारा कराए गए डी-सिल्टेशन और गहरीकरण कार्यों से तालाबों की क्षमता में सुधार हुआ है। वहीं, आउटलेट की मरम्मत और सुधार के बाद बारिश का पानी अब पहले की तुलना में अधिक समय तक तालाबों में ठहर रहा है।
हैंडपंप और बोरिंग में भी दिखा जल संरक्षण का असर
जल संरक्षण कार्यों का असर अब भूजल स्तर पर भी दिखाई देने का दावा ग्रामीणों द्वारा किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले पानी की कमी के चलते कई हैंडपंप गर्मी के दिनों में बंद हो जाते थे।
वहीं, कुछ बोरिंग में जहां जनवरी तक ही पानी उपलब्ध हो पाता था, अब मई-जून तक भी पानी मिलने की स्थिति बनी हुई है।
ग्रामीणों के अनुसार, तालाबों के गहरीकरण, चेक डेम और अन्य जल संरचनाओं के निर्माण से बारिश का पानी क्षेत्र में अधिक समय तक रुक रहा है। इसका फायदा न केवल भूजल रिचार्ज के रूप में मिल रहा है, बल्कि गर्मी के दिनों में पानी की उपलब्धता में भी सुधार देखने को मिल रहा है।
जल संरक्षण के इन प्रयासों से क्षेत्र में वर्षा जल संचयन, भूजल संवर्धन और ग्रामीण क्षेत्रों में जल उपलब्धता को लेकर सकारात्मक बदलाव सामने आ रहा है।




