400 मीटर की सड़क बनी आफत, कीचड़-दलदल के बीच स्कूल पहुंच रहे बच्चे
कुआं-पड़वार मार्ग की बदहाली पर जिम्मेदारों की चुप्पी, बारिश में बढ़ा हादसे का खतरा

कुआं-पड़वार मार्ग की बदहाली पर जिम्मेदारों की चुप्पी, बारिश में बढ़ा हादसे का खतरा,
✍️राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी/बहोरीबंद। विकास के दावों के बीच ग्राम कुआं से पड़वार को जोड़ने वाले मार्ग का करीब 400 मीटर हिस्सा बदहाली की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, जहां सड़क कम और कीचड़-दलदल ज्यादा नजर आता है। जगह-जगह गड्ढे, उखड़ी सड़क और बारिश का पानी राहगीरों के लिए मुसीबत बन गया है। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि इसी रास्ते से रोजाना स्कूली बच्चे भी गुजरते हैं।
गड्ढों में पानी, सड़क पर कीचड़ और हर कदम पर खतरा
बारिश होते ही सड़क की हालत और बिगड़ जाती है। गड्ढों में पानी भर जाने से उनकी गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है। वहीं कीचड़ और फिसलन के कारण दोपहिया वाहन चालकों के साथ पैदल राहगीरों के लिए भी यह रास्ता जोखिम भरा हो गया है। सामने से वाहन आने पर सड़क की खराब स्थिति के कारण संतुलन बिगड़ने की आशंका बनी रहती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों की रोज परीक्षा
इस मार्ग से प्रतिदिन स्कूली बच्चे आवाजाही करते हैं। बारिश के दिनों में बच्चों को कीचड़ और पानी के बीच से होकर स्कूल जाना पड़ रहा है। फिसलन के कारण गिरने का खतरा बना रहता है, जबकि वाहनों की आवाजाही के बीच सुरक्षित निकलना भी चुनौती बन गया है।
अभिभावकों का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई के लिए स्कूल तक पहुंचने वाला रास्ता सुरक्षित होना चाहिए, लेकिन यहां सड़क की बदहाली के कारण हर दिन चिंता बनी रहती है। उनका सवाल है कि आखिर किसी बड़े हादसे के बाद ही जिम्मेदारों की नींद खुलेगी?
400 मीटर की सड़क पर कब पहुंचेगी जिम्मेदारों की नजर?
ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क की समस्या कोई नई नहीं है। लंबे समय से बदहाल इस हिस्से की ओर जिम्मेदार विभाग का अपेक्षित ध्यान नहीं गया। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की मरम्मत कोई बड़ी चुनौती नहीं है, लेकिन विभागीय उदासीनता के कारण समस्या लगातार बनी हुई है।
हादसे से पहले जागने की जरूरत
ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से तत्काल मौके का निरीक्षण कराकर सड़क की मरम्मत कराने की मांग की है। उनका कहना है कि गड्ढों को भरने, सड़क को समतल करने और जलभराव की समस्या दूर करने की जरूरत है।
ग्रामीणों की मांग साफ है—हादसा होने का इंतजार नहीं, उससे पहले सड़क सुधारी जाए। करीब 400 मीटर का यह खराब हिस्सा कब तक ग्रामीणों और स्कूली बच्चों के लिए जोखिम बना रहेगा, यह अब जिम्मेदार विभाग के सामने बड़ा सवाल है।




