फीस और ड्रेस की मजबूरी बनी पढ़ाई में बाधा, शिक्षक पहुंचे जंगल की पगडंडी तक
शिक्षकों की संवेदनशील पहल से स्कूल से दूर हुईं कक्षा 10वीं की अंकिता और सरिता फिर लौटेंगी शिक्षा की राह पर

शिक्षकों की संवेदनशील पहल से स्कूल से दूर हुईं कक्षा 10वीं की अंकिता और सरिता फिर लौटेंगी शिक्षा की राह पर,
✍️राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय नैगवा में शिक्षकों की संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की एक मिसाल सामने आई है। कक्षा 10वीं की दो छात्राएं जब लगातार स्कूल नहीं पहुंचीं, तो विद्यालय के प्राचार्य सहित शिक्षकों ने केवल अनुपस्थिति दर्ज करने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि उनकी परेशानी जानने के लिए उनके घर तक पहुंचे। छात्राओं के घर पर नहीं मिलने पर शिक्षक करीब तीन किलोमीटर की दूरी तय कर खुसरा महादेव तक पहुंचे और दोनों छात्राओं से मुलाकात की।
मामला सामने आया तो पता चला कि आर्थिक परिस्थितियों के चलते दोनों छात्राएं स्कूल से दूर थीं। एक छात्रा के सामने फीस जमा करने की समस्या थी, जबकि दूसरी छात्रा के पास स्कूल की ड्रेस नहीं थी। इन छोटी-छोटी जरूरतों के कारण उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही थी।
विद्यालय के प्राचार्य विपिन तिवारी ने छात्राओं से बातचीत कर उन्हें भरोसा दिलाया कि आर्थिक परेशानी उनकी पढ़ाई में बाधा नहीं बनने दी जाएगी।
सरिता ने बताया कि उसके पास स्कूल की फीस जमा करने के लिए पैसे नहीं थे, जिसके कारण वह विद्यालय नहीं आ रही थी। इस पर प्राचार्य ने उसे आश्वस्त करते हुए कहा कि वह नियमित रूप से स्कूल आए और फीस की चिंता न करे। विद्यालय स्तर पर उसकी समस्या के समाधान की व्यवस्था की जाएगी।
वहीं, दूसरी छात्रा अंकिता के पास स्कूल की ड्रेस नहीं थी। ड्रेस के अभाव में वह विद्यालय आने में झिझक रही थी। प्राचार्य ने उसे भी भरोसा दिलाया कि ड्रेस की व्यवस्था विद्यालय की ओर से की जाएगी और उसे पढ़ाई नहीं छोड़नी है।
शिक्षकों की इस पहल के बाद दोनों छात्राओं ने दोबारा विद्यालय आने और अपनी पढ़ाई जारी रखने की सहमति दी।
प्राचार्य विपिन तिवारी का कहना है कि किसी भी बच्चे की शिक्षा आर्थिक परेशानी, फीस या ड्रेस जैसी छोटी-छोटी जरूरतों के कारण बाधित नहीं होनी चाहिए। विद्यालय का प्रयास है कि प्रत्येक बच्चा नियमित रूप से स्कूल आए, शिक्षा प्राप्त करे और अपने बेहतर भविष्य की दिशा में आगे बढ़े।
नैगवा विद्यालय के शिक्षकों की यह पहल इस बात का संदेश देती है कि शिक्षक की जिम्मेदारी केवल कक्षा में पढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि जरूरत पड़ने पर विद्यार्थियों तक पहुंचकर उनकी समस्याओं को समझना और समाधान की दिशा में प्रयास करना भी शिक्षा व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है।




