यूजीसी बिल और आरक्षण व्यवस्था के विरोध में आंदोलन तेज, 18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी
17 सितंबर तक सांसद से आंदोलन स्थल पहुंचकर मांगें सुनने और ठोस आश्वासन देने की मांग

17 सितंबर तक सांसद से आंदोलन स्थल पहुंचकर मांगें सुनने और ठोस आश्वासन देने की मांग,
राजेश कुमार तिवारी के साथ राजेश सांघेलिया
कटनी। यूजीसी बिल, आरक्षण व्यवस्था और एससी/एसटी एक्ट से जुड़ी विभिन्न मांगों को लेकर कटनी कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार पर 7 सितंबर से जारी अनशन अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद के राष्ट्रीय महासचिव अवधेश उरमलिया ने 18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी दी है।
आंदोलनकारियों का कहना है कि यदि 17 सितंबर तक क्षेत्रीय सांसद आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी मांगें नहीं सुनते और ठोस आश्वासन नहीं मिलता है, तो 18 सितंबर को आत्मदाह का कदम उठाया जाएगा।
आंदोलन में अखिल भारतीय ब्राह्मण एकीकृत परिषद, श्री राजपूत करणी सेना सहित विभिन्न संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हैं। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में आरक्षण व्यवस्था को जातिगत आधार के बजाय आर्थिक आधार पर लागू करना, यूजीसी कानून को वापस लेना तथा एससी/एसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज करने से पहले सक्षम अधिकारी से जांच कराए जाने की मांग शामिल है।
अनशनकारियों राकेश मिश्रा, अवधेश उरमलिया और सुरजीत सिंह सोलंकी ने कहा कि वे अपनी मांगों को लेकर लगातार आंदोलन कर रहे हैं। उन्होंने क्षेत्रीय सांसद से 17 सितंबर तक आंदोलन स्थल पर पहुंचकर उनकी बात सुनने और मांगों को लोकसभा में उठाने की मांग की है।
आंदोलनकारियों के मुताबिक, मांगों पर उचित और ठोस आश्वासन मिलने पर अनशन समाप्त किया जा सकता है। वहीं, निर्धारित समय-सीमा तक पहल नहीं होने पर 18 सितंबर को आत्मदाह की चेतावनी दी गई है।
इस मामले में उपलब्ध स्थानीय जानकारी के अनुसार, चेतावनी को लेकर प्रशासन की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आंदोलन स्थल पर नारायण प्रसाद समदड़िया, ब्राह्मण समाज अध्यक्ष राजू शर्मा, विवेक तिवारी, भरत तिवारी, गुरमुख बाघरानी, चेतन सचदेवा, मोहित ठाकुर, मनोज मिश्रा, सचिन रजक, दीपक मिश्रा सहित अन्य लोग मौजूद रहे।




