साइबर ठगी से बचाव के साथ कानूनी राहत की जानकारी, कटनी में एक दिवसीय प्रशिक्षण
इन्वेस्टमेंट स्कैम, डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड, सिम स्वैप और डिजिटल साक्ष्य संरक्षण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी

इन्वेस्टमेंट स्कैम, डिजिटल अरेस्ट, UPI फ्रॉड, सिम स्वैप और डिजिटल साक्ष्य संरक्षण पर विशेषज्ञों ने दी जानकारी,
राजेश कुमार तिवारी
कटनी। डिजिटल तकनीक और ऑनलाइन लेन-देन के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराधों की चुनौती भी बढ़ रही है। साइबर ठगी से बचाव के साथ ही घटना के बाद उपलब्ध कानूनी उपायों की जानकारी देने के उद्देश्य से कटनी में साइबर विवाद समाधान विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक अभिनव विश्वकर्मा, जिला पंचायत सीईओ हरसिमरनप्रीत कौर और जिला प्रबंधक सौरभ नामदेव की उपस्थिति रही। मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रॉनिक्स डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा तन्वी सोशल सर्विसेस समिति के सहयोग से आयोजित प्रशिक्षण में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत उपलब्ध कानूनी उपाय, डिजिटल साक्ष्य, जांच प्रक्रिया और एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की भूमिका पर विस्तार से जानकारी दी गई।
निवेश के नाम पर पहले भरोसा, फिर बड़ी रकम की ठगी
प्रशिक्षण में इन्वेस्टमेंट स्कैम के बढ़ते मामलों और उनके तौर-तरीकों को उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया। बताया गया कि साइबर अपराधी शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी और अन्य ऑनलाइन निवेश में कम समय में अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों को अपने जाल में फंसाते हैं।
अपराधी शुरुआत में छोटी रकम पर लाभ दिखाकर भरोसा कायम करते हैं और बाद में बड़ी रकम निवेश कराने के बाद पैसे निकालने पर टैक्स, विथड्रॉल फीस या अन्य शुल्क के नाम पर अतिरिक्त रकम की मांग करते हैं। प्रतिभागियों को ऐसे संदिग्ध निवेश प्रस्तावों की पूरी जानकारी और सत्यापन के बाद ही निर्णय लेने की सलाह दी गई।
डिजिटल अरेस्ट से सिम स्वैप तक, ठगी के तरीकों की दी जानकारी
प्रशिक्षण में डिजिटल अरेस्ट, OTP और UPI फ्रॉड, इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, फिशिंग, सोशल मीडिया फ्रॉड, अनधिकृत एक्सेस और सिम स्वैप जैसे साइबर अपराधों पर भी चर्चा की गई। साइबर अपराधियों द्वारा गोपनीय जानकारी हासिल कर बैंक खातों और डिजिटल भुगतान प्रणालियों तक पहुंच बनाने के तरीकों के बारे में बताया गया।
विशेषज्ञों ने OTP, PIN, पासवर्ड, बैंकिंग क्रेडेंशियल और अन्य संवेदनशील जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने तथा संदिग्ध लिंक, कॉल और ऑनलाइन ऑफर से सतर्क रहने की अपील की।
साइबर ठगी के बाद डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना जरूरी
प्रशिक्षण में बताया गया कि साइबर फ्रॉड होने के बाद उपलब्ध डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना जांच और कानूनी कार्रवाई में महत्वपूर्ण हो सकता है। पीड़ितों को ट्रांजेक्शन डिटेल, UTR अथवा ट्रांजेक्शन आईडी, बैंक स्टेटमेंट, स्क्रीनशॉट, SMS, ई-मेल, मोबाइल नंबर, यूजर आईडी और अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की जानकारी दी गई।
IT Act के तहत मुआवजे से जुड़ी कानूनी व्यवस्था पर चर्चा
कार्यक्रम में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत एडजुडिकेटिंग ऑफिसर की भूमिका को भी विस्तार से समझाया गया। बताया गया कि अधिनियम में कुछ प्रकार के उल्लंघनों से होने वाली क्षति, नुकसान और मुआवजे से संबंधित मामलों के निपटारे की वैधानिक व्यवस्था है।
आईटी एक्ट की धारा 46 के तहत एडजुडिकेटिंग ऑफिसर और एडजुडिकेशन की व्यवस्था का उल्लेख करते हुए पात्र मामलों में निर्धारित सीमा तक मामलों की सुनवाई से संबंधित प्रावधानों की जानकारी दी गई।
अनधिकृत एक्सेस और सिम स्वैप से होने वाले नुकसान पर भी चर्चा
प्रशिक्षण में बिना अनुमति कंप्यूटर या डेटा तक पहुंच, डेटा की कॉपी अथवा डाउनलोड, डिलीट या क्षति पहुंचाने जैसे मामलों में लागू कानूनी प्रावधानों की जानकारी दी गई। इसके साथ ही सिम डीएक्टिवेशन, डुप्लीकेट सिम और सिम स्वैप के कारण होने वाले वित्तीय नुकसान से जुड़े मामलों में उपलब्ध कानूनी उपायों पर भी चर्चा की गई।
जांच एजेंसी और डिजिटल साक्ष्य की भूमिका अहम
कार्यक्रम के दौरान बताया गया कि साइबर अपराध की शिकायत मिलने के बाद तथ्यों का सत्यापन, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और संकलन, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड व ट्रांजेक्शन ट्रेल की जांच तथा संबंधित व्यक्तियों या संस्थाओं से आवश्यक जानकारी हासिल करना जांच प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
जहां मामले में आपराधिक अपराध के तत्व पाए जाते हैं, वहां लागू कानून के तहत आपराधिक जांच और कार्रवाई की जा सकती है। वहीं आईटी एक्ट के अंतर्गत संबंधित मामलों में निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार एडजुडिकेशन की कार्रवाई की जा सकती है।
प्रशिक्षण के दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए समय पर शिकायत, डिजिटल साक्ष्यों का संरक्षण और उपलब्ध कानूनी उपायों की सही जानकारी बेहद महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों और संबंधित संस्थाओं को साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ साइबर विवाद की स्थिति में उपलब्ध वैधानिक राहत के रास्तों से अवगत कराना रहा।




