सड़क पर बैठा गोवंश नहीं, व्यवस्था की मजबूरी? चरागाह भूमि पर अतिक्रमण से बढ़ा हादसों का खतरा

सड़क पर बैठा गोवंश नहीं, व्यवस्था की मजबूरी? चरागाह भूमि पर अतिक्रमण से बढ़ा हादसों का खतरा,
✍️राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। जिले के रीठी, ढीमरखेड़ा, विजयराघवगढ़, बहोरीबंद सहित ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों में सड़कों पर बेसहारा गोवंश का जमावड़ा लगातार गंभीर समस्या बनता जा रहा है। मुख्य मार्गों, चौराहों और गांवों की सड़कों पर मवेशियों के बैठे रहने से जहां यातायात प्रभावित हो रहा है, वहीं सड़क दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ गया है।
स्थानीय स्तर पर उठ रहे सवालों के बीच समस्या का एक बड़ा कारण शासकीय और चरागाह भूमि पर बढ़ता अतिक्रमण भी माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जब गोवंश के चरने और सुरक्षित विचरण के लिए जमीन ही उपलब्ध नहीं रहेगी, तो मवेशी आखिर जाएंगे कहां? ऐसे में वे सड़कों और सार्वजनिक स्थानों का रुख करने को मजबूर हो जाते हैं।
चरागाह की जमीन पर कब्जा, गोवंश के सामने संकट
गांवों में परंपरागत रूप से गोवंश के लिए चरागाह और गोचर भूमि उपलब्ध रहती थी। इन स्थानों पर पशु आसानी से चरते और विश्राम करते थे। लेकिन समय के साथ कई क्षेत्रों में शासकीय और चरागाह भूमि पर अतिक्रमण की शिकायतें सामने आती रही हैं। कहीं मकान और अन्य निर्माण खड़े हो गए हैं, तो कहीं कृषि या व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने लगी हैं।
चरागाह क्षेत्र कम होने के साथ ही पशुओं के लिए हरे चारे और पानी के प्राकृतिक स्रोत भी सीमित होते जा रहे हैं। इसका सीधा असर ग्रामीण क्षेत्रों में घूमने वाले गोवंश पर दिखाई दे रहा है।
सड़क बनी गोवंश का सहारा, हादसों का बढ़ा खतरा
चरने और सुरक्षित रहने के लिए पर्याप्त स्थान नहीं मिलने पर बड़ी संख्या में मवेशी सड़कों पर दिखाई देते हैं। दिन में तो वाहन चालक किसी तरह बचाव कर लेते हैं, लेकिन रात के समय यह स्थिति और अधिक खतरनाक हो जाती है।
अचानक सड़क पर बैठे या दौड़ते हुए मवेशियों के सामने आने से दोपहिया वाहन चालकों और तेज रफ्तार वाहनों के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा बना रहता है। हादसों में जहां वाहन चालक और यात्री घायल हो सकते हैं, वहीं गोवंश भी गंभीर रूप से घायल होकर दम तोड़ देता है।
कचरे और प्लास्टिक के सहारे जिंदगी
चरागाह और सुरक्षित विचरण क्षेत्र के अभाव में कई मवेशी सड़क किनारे पड़े कचरे में भोजन तलाशते नजर आते हैं। कचरे के साथ प्लास्टिक और दूषित खाद्य पदार्थ खाने से उनके स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है। पशु संरक्षण से जुड़े लोगों का कहना है कि यह स्थिति गोवंश के लिए बेहद चिंताजनक है।
सवाल सिर्फ गोवंश को सड़क से हटाने का नहीं
प्रशासन के सामने चुनौती केवल सड़कों से मवेशियों को हटाने तक सीमित नहीं है। जब तक उनके लिए सुरक्षित चराई और आश्रय की स्थायी व्यवस्था नहीं होगी, तब तक गोवंश के दोबारा सड़कों पर लौटने की समस्या बनी रह सकती है।
ग्रामीणों का सवाल है कि यदि गांव की शासकीय अथवा चरागाह भूमि पर अतिक्रमण हो चुका है और पशुओं के लिए निर्धारित स्थान उपलब्ध नहीं है, तो उन्हें सुरक्षित स्थान आखिर मिलेगा कहां?
राजस्व रिकॉर्ड की जांच और सीमांकन जरूरी
इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन को गांववार राजस्व रिकॉर्ड की जांच कर यह पता लगाने की जरूरत है कि कितनी शासकीय और चरागाह भूमि दर्ज है और मौके पर वास्तव में कितनी भूमि उपलब्ध है।
जहां अतिक्रमण की शिकायतें हैं, वहां निष्पक्ष भौतिक सत्यापन और सीमांकन कराया जाए। जांच में अतिक्रमण पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई कर चरागाह भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया जाना जरूरी है।
गौशालाओं के साथ विकसित हों सुरक्षित चरागाह
गोवंश संरक्षण के लिए केवल गौशाला बनाना पर्याप्त नहीं है। गौशालाओं के आसपास उपलब्ध शासकीय भूमि को चरागाह के रूप में विकसित किया जा सकता है। वहां घास और चारे की व्यवस्था, पानी के स्रोत, फेंसिंग तथा आवश्यक आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर गोवंश को सुरक्षित वातावरण मिल सकता है।
सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से चरागाह विकास, जल संरक्षण और गौशाला आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने की संभावनाएं भी हैं। जरूरत इस बात की है कि इन प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन जमीन पर दिखाई दे।
जमीन सुरक्षित होगी, तभी गोवंश भी सुरक्षित रहेगा
गोवंश को सड़क से हटाना तत्काल समाधान हो सकता है, लेकिन स्थायी समाधान तभी संभव है जब उसके लिए चरने, पानी पीने और सुरक्षित रहने की जमीन सुनिश्चित की जाए।
कटनी जिले के ग्रामीण क्षेत्रों से लेकर पूरे मध्य प्रदेश के कस्बाई और ग्रामीण अंचलों तक यह समस्या प्रशासन के लिए गंभीर चिंता का विषय बनती जा रही है। अब जरूरत है कि शासकीय और चरागाह भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के साथ गोवंश के लिए सुरक्षित चराई क्षेत्र विकसित किए जाएं, ताकि न गोवंश सड़कों पर भटके और न ही वाहन चालकों की जिंदगी खतरे में पड़े।




