सेवानिवृत्ति के बाद भी नहीं टूटा विद्यार्थियों से नाता, नि:शक्त शिक्षक मार्तण्ड सिंह राजपूत बने मिसाल
42 वर्षों तक शिक्षा विभाग में दी सेवाएं, अब जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद और विद्यालयों के विकास में निभा रहे सक्रिय भूमिका

42 वर्षों तक शिक्षा विभाग में दी सेवाएं, अब जरूरतमंद विद्यार्थियों की मदद और विद्यालयों के विकास में निभा रहे सक्रिय भूमिका,
राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक और विद्यार्थी का रिश्ता सेवा निवृत्ति के बाद भी कायम रह सकता है, इसका प्रेरणादायी उदाहरण सहायक शिक्षक रहे मार्तण्ड सिंह राजपूत प्रस्तुत कर रहे हैं। सितंबर 2025 में 62 वर्ष की अधिवार्षिकी आयु पूर्ण कर सेवानिवृत्त हुए नि:शक्त शिक्षक राजपूत का विद्यालयों और विद्यार्थियों से जुड़ाव आज भी उतना ही मजबूत है, जितना सेवाकाल के दौरान रहा।
शिक्षा विभाग में करीब 42 वर्षों की उत्कृष्ट सेवा देने के बाद सेवानिवृत्त हुए राजपूत आज भी जिले के विभिन्न विद्यालयों में पहुंचकर विद्यार्थियों और शिक्षकों से संवाद करते नजर आते हैं। विशेष रूप से जरूरतमंद और गरीब बच्चों की छोटी-बड़ी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वे अपनी ओर से प्रयास करते हैं।
अपने गृह ग्राम धनवारा (बड़वारा) तथा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों में पहुंचकर वे विद्यार्थियों से आत्मीयता के साथ संवाद करते हैं। जिन बच्चों का जन्मदिन होता है, उन्हें वे उपहार स्वरूप अध्ययन सामग्री भेंट कर उनका उत्साह बढ़ाते हैं। उनका मानना है कि बच्चों के चेहरे पर मुस्कान लाना और उन्हें शिक्षा के प्रति प्रेरित करना ही शिक्षक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धि है।
कटनी से गृह ग्राम धनवारा जाते समय रास्ते में आने वाले विद्यालयों में भी वे सहजता से पहुंच जाते हैं। यहां वे विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों, संसाधनों और समस्याओं को लेकर चर्चा करते हैं तथा जरूरत के अनुसार उनके निराकरण में सहयोग की भूमिका निभाते हैं।
एक भेंट के दौरान राजपूत ने कहा कि लंबे समय तक विद्यालयों में सेवा देने के कारण उनका विद्यार्थियों के साथ गहरा भावनात्मक जुड़ाव हो गया है। उनका कहना है कि जब तक वे दिन में कम से कम एक बार किसी विद्यालय में पहुंचकर बच्चों से संवाद नहीं कर लेते और जरूरतमंद विद्यार्थियों की यथासंभव मदद नहीं कर देते, तब तक उन्हें आत्मिक संतोष नहीं मिलता।
गृह ग्राम के विद्यालय को गोद लेने की तैयारी
मार्गन राजपूत ने बताया कि वे अपने गृह ग्राम के विद्यालय को गोद लेकर उसके सर्वांगीण विकास में योगदान देने की रणनीति पहले ही बना चुके हैं। विद्यालय की शैक्षणिक एवं मूलभूत आवश्यकताओं से जुड़ी छोटी-बड़ी समस्याओं के समाधान के लिए वे आगे भी सक्रिय भूमिका निभाने के इच्छुक हैं।
शिक्षकों को दिया कर्तव्य और समर्पण का संदेश
सेवानिवृत्त शिक्षक राजपूत ने जिले के शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को पूरी निष्ठा, ईमानदारी और समर्पण के साथ अध्ययन-अध्यापन कराएं। उनका कहना है कि एक शिक्षक जब अपने कर्तव्य का ईमानदारी से निर्वहन करता है, तो उसे विद्यार्थियों और अभिभावकों के बीच जो सम्मान मिलता है, वह सेवानिवृत्ति के बाद भी बना रहता है।
उन्होंने कहा कि ईश्वर ने शिक्षकों को बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें संस्कारित करने का अवसर दिया है। इस अवसर का सदुपयोग करते हुए प्रत्येक शिक्षक को प्रयास करना चाहिए कि उसका विद्यार्थी जीवन में निरंतर आगे बढ़े और कभी पीछे मुड़कर देखने की आवश्यकता महसूस न करे।
मार्तण्ड सिंह राजपूत का सेवाकाल के बाद भी विद्यार्थियों के प्रति यह समर्पण न केवल शिक्षा जगत के लिए प्रेरणादायी है, बल्कि यह संदेश भी देता है कि सच्चे शिक्षक का रिश्ता नौकरी से नहीं, बल्कि अपने विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा होता है।




