तीन साल बाद भी ग्रामीणों को नहीं मिला नल-जल योजना का लाभ, हैंडपंपों के भरोसे ग्रामीण
कछार गांव छोटा में 1.35 करोड़ रुपये की योजना पर उठे सवाल, सड़कें खोदकर छोड़ने और टंकी निर्माण में घटिया सामग्री के इस्तेमाल के आरोप

मुख्यमंत्री और कलेक्टर से ग्रामीणों ने की उच्चस्तरीय जांच की मांग, पीएचई विभाग ने जल्द कार्य पूरा कराने का दिया आश्वासन,
राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
ढीमरखेड़ा (कटनी)। सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल, हर घर जल’ योजना के क्रियान्वयन में लापरवाही के आरोप सामने आए हैं। कटनी जिले की ढीमरखेड़ा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत कछार गांव छोटा में करीब तीन वर्ष बीत जाने के बाद भी ग्रामीणों को नल-जल योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। घरों तक नियमित पेयजल आपूर्ति शुरू नहीं होने के कारण ग्रामीण आज भी पानी के लिए हैंडपंपों पर निर्भर हैं। इससे योजना के कार्यों और जिम्मेदार विभागीय अधिकारियों की निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सड़कें खोदकर छोड़ीं, निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल
ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्रामीणों के अनुसार, जल जीवन मिशन के तहत करीब तीन वर्ष पहले लगभग 1 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत से नल-जल योजना का कार्य शुरू कराया गया था। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में लापरवाही बरती गई और निर्धारित समय में योजना को पूरी तरह संचालित नहीं किया जा सका।
ग्रामीणों के मुताबिक, पाइपलाइन बिछाने के लिए गांव की सड़कों को खोदा गया, लेकिन बाद में उनकी मरम्मत नहीं कराई गई। इससे आवागमन में परेशानी हो रही है और दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है। वहीं, कई घरों तक नल कनेक्शन नहीं पहुंचने के कारण ग्रामीण योजना के लाभ से वंचित हैं।
इसके अलावा, पानी की टंकी के निर्माण में घटिया गुणवत्ता की रेत का इस्तेमाल किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराए जाने की मांग की है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और संभावित जोखिमों का समय रहते निराकरण हो।
मुख्यमंत्री और कलेक्टर से जांच की गुहार
लंबे समय से पेयजल सुविधा का इंतजार कर रहे ग्रामीणों में नाराजगी है। ग्राम पंचायत के सरपंच और ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा कटनी कलेक्टर आशीष तिवारी को ज्ञापन सौंपकर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि योजना के निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, खर्च की गई राशि और कार्य की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही, यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। ग्रामीणों ने जल्द से जल्द नल-जल योजना शुरू कराकर घरों तक पेयजल पहुंचाने और खोदी गई सड़कों की मरम्मत कराने की भी मांग की है।
पीएचई विभाग ने जल्द समाधान का दिया आश्वासन
इस मामले में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (पीएचई) विभाग के एसडीओ मोहित तिवारी का कहना है कि ठेकेदार द्वारा योजना का अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है। शेष कार्य को जल्द पूरा कराकर योजना ग्राम पंचायत को हस्तांतरित कर दी जाएगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल पंप ऑपरेटर से संबंधित कुछ समस्याओं के कारण योजना के संचालन में दिक्कतें आ रही हैं, जिनका शीघ्र निराकरण कराया जाएगा।
अब सवाल यह है कि करीब 1 करोड़ 35 लाख रुपये की लागत वाली योजना का लाभ ग्रामीणों को कब तक मिल पाएगा। विभाग द्वारा जल्द कार्य पूरा कराने के आश्वासन के बीच ग्रामीणों को इंतजार है कि उन्हें कब नियमित पेयजल सुविधा मिलेगी और निर्माण कार्यों को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच कब होगी।




