स्लीमनाबाद की विशाल वाटर टनल बनी झारखंड के प्रतिनिधिमंडल के आकर्षण का केंद्र
सेवा संकल्प अभियान के तहत पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जानी टनल की तकनीक और निर्माण की खूबियां, आधुनिक इंजीनियरिंग को बताया जल प्रबंधन का शानदार उदाहरण

सेवा संकल्प अभियान के तहत पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने जानी टनल की तकनीक और निर्माण की खूबियां, आधुनिक इंजीनियरिंग को बताया जल प्रबंधन का शानदार उदाहरण,
राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। नर्मदा के जल को दूर-दराज के खेतों तक पहुंचाने की महत्वाकांक्षी योजना के तहत स्लीमनाबाद में निर्मित देश की सबसे लंबी वाटर टनल सोमवार को झारखंड से आए इन्फ्लुएंसर्स के प्रतिनिधिमंडल के लिए आकर्षण का केंद्र रही। सेवा संकल्प अभियान के तहत कटनी पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने स्लीमनाबाद स्थित वाटर टनल का अवलोकन किया और इसके निर्माण में इस्तेमाल की गई अत्याधुनिक तकनीक, इंजीनियरिंग और जल परिवहन क्षमता की जानकारी ली।
प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों ने भूमिगत सुरंग की निर्माण तकनीक, संरचना और कार्यप्रणाली को करीब से समझा। उन्होंने कहा कि जमीन की सतह से कई मीटर नीचे इतनी लंबी और विशाल जल सुरंग का निर्माण आधुनिक इंजीनियरिंग की उल्लेखनीय उपलब्धि है। प्रतिनिधिमंडल ने इसे जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन और तकनीक के प्रभावी उपयोग का शानदार उदाहरण बताया।
12 किलोमीटर लंबी और 10.14 मीटर व्यास की टनल
नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव ने प्रतिनिधिमंडल को स्लीमनाबाद वाटर टनल की निर्माण प्रक्रिया और तकनीकी विशेषताओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि करीब 12 किलोमीटर लंबी इस वाटर टनल का व्यास 10.14 मीटर है और इसमें 152 क्यूमेक पानी के डिस्चार्ज की क्षमता है। टनल का निर्माण कई स्थानों पर जमीन की सतह से करीब 20 से 40 मीटर नीचे किया गया है।
निर्माण के दौरान 10 लाख क्यूबिक मीटर से अधिक मिट्टी की खुदाई की गई। इतनी बड़ी मात्रा में भूमिगत खुदाई कर तकनीकी मानकों के अनुरूप सुरंग का निर्माण करना बड़ी चुनौती थी, जिसे आधुनिक मशीनरी, तकनीक और विशेषज्ञ इंजीनियरिंग के माध्यम से पूरा किया गया।
नर्मदा जल से 1.85 लाख हेक्टेयर क्षेत्र को सिंचाई का लाभ
बरगी व्यपवर्तन परियोजना का उद्देश्य नर्मदा के जल को मध्यप्रदेश के बड़े भू-भाग तक पहुंचाकर सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करना है। परियोजना के तहत जबलपुर स्थित बरगी बांध से नर्मदा जल को सतना, मैहर, कटनी, रीवा और पन्ना जिलों तक पहुंचाया जाएगा।
परियोजना के पूरा होने पर इन जिलों में करीब 1 लाख 85 हजार हेक्टेयर कमांड क्षेत्र को सिंचाई सुविधा का लाभ मिलेगा। स्लीमनाबाद की वाटर टनल इस महत्वाकांक्षी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो भूमिगत जल परिवहन की आधुनिक तकनीक और बड़े पैमाने पर जल प्रबंधन की क्षमता को प्रदर्शित करती है।




