मौसम के साथ बदलता है कुंड का पानी, ढीमरखेड़ा का रहस्यमयी शिवधाम बना आस्था का केंद्र

मौसम के साथ बदलता है कुंड का पानी, ढीमरखेड़ा का रहस्यमयी शिवधाम बना आस्था का केंद्र,
राजेश कुमार तिवारी कटनी न्यूज 24
कटनी। सावन के पवित्र महीने में भगवान भोलेनाथ की आराधना को लेकर श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। जिले के ढीमरखेड़ा क्षेत्र में स्थित एक प्राचीन शिव मंदिर इन दिनों आस्था के साथ-साथ अपनी अनूठी प्राकृतिक विशेषता को लेकर भी चर्चा में है। ग्राम देवरी मारवाड़ी में महानदी के तट पर स्थित इस सिद्ध शिव मंदिर के समीप मौजूद प्राकृतिक जलकुंड श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए कौतूहल का केंद्र बना हुआ है।
मौसम के विपरीत बदलती है कुंड के पानी की तासीर
जिला मुख्यालय कटनी से ढीमरखेड़ा और वहां से करीब 22 किलोमीटर दूर ग्राम देवरी मारवाड़ी में स्थित इस प्राकृतिक कुंड की सबसे खास बात इसके पानी का तापमान बताया जाता है। स्थानीय लोगों के अनुसार गर्मी के मौसम में जब तापमान काफी बढ़ जाता है, तब कुंड का पानी अपेक्षाकृत ठंडा रहता है। वहीं सर्दियों में इसी कुंड का पानी गर्म महसूस होने की बात कही जाती है।
प्राकृतिक रहस्य बना कौतूहल का विषय
कुंड के पानी में मौसम के विपरीत महसूस होने वाले इस बदलाव को लेकर स्थानीय स्तर पर अलग-अलग मान्यताएं हैं। हालांकि इसके पीछे का वैज्ञानिक कारण क्या है, इसे लेकर कोई आधिकारिक वैज्ञानिक अध्ययन या निष्कर्ष सामने नहीं आया है। यही वजह है कि प्राकृतिक रूप से होने वाले इस बदलाव को देखने और अनुभव करने के लिए लोग यहां पहुंचते हैं।
महादेव के प्रति गहरी आस्था
महानदी के तट पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और आसपास के लोगों में गहरी आस्था है। श्रद्धालु इस प्राकृतिक कुंड को भगवान भोलेनाथ की कृपा और प्रकृति के अनूठे उपहार के रूप में देखते हैं। मंदिर परिसर में पहुंचने वाले श्रद्धालु कुंड के जल से स्नान कर भगवान शिव का पूजन-अर्चन और जलाभिषेक करते हैं।
सावन में बढ़ी श्रद्धालुओं की आवाजाही
सावन के महीने में इस शिवधाम पर श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ जाती है। विशेषकर सावन सोमवार के अवसर पर सुबह से ही बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचते हैं। महानदी के तट पर विराजमान भगवान भोलेनाथ के दर्शन, पूजन और जलाभिषेक के साथ श्रद्धालु प्राकृतिक कुंड को भी देखने पहुंचते हैं।
ढीमरखेड़ा क्षेत्र का यह प्राचीन शिव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ प्रकृति की अनोखी विशेषता को अपने भीतर समेटे हुए है। कुंड के पानी की बदलती तासीर का रहस्य भले ही आज भी अनसुलझा हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान आस्था, विश्वास और प्रकृति के अद्भुत संगम का प्रतीक बना हुआ है।




